HINDI SAHITYA : नाथ साहित्य (NATH SAHITYA) के बारे में जानें

नाथ साहित्य (NATH SAHITYA) के बारे में जानकारी

  • भगवान शिव के उपासक नाथों के द्वारा जो साहित्य रचा गया, वही नाथ साहित्य कहलाता है।
  • राहुल संकृत्यायन ने नाथपंथ को सिद्धों की परंपरा का ही विकसित रूप माना है।
  • हजारी प्रसाद द्विवेदी ने नाथपन्थ या नाथ सम्प्रदाय को ‘सिद्ध मत’, ‘सिद्ध मार्ग’, ‘योग मार्ग’, ‘योग संप्रदाय’, ‘अवधूत मत’ एवं ‘अवधूत संप्रदाय’ के नाम से पुकारा है।

नाथ साहित्य की विशेषताएँ

  • इसमें ज्ञान निष्ठा को पर्याप्त महत्व प्रदान किया गया है,
  • इसमें मनोविकारों की निंदा की गई है,
  • इस साहित्य में नारी निन्दा का सर्वाधिक उल्लेख प्राप्त होता है,
  • इसमें सिद्ध साहित्य के भोग-विलास की भर्त्सना की गई है,
  • इस साहित्य में गुरु को विशेष महत्व प्रदान किया गया है,
  • इस साहित्य में हठयोग का उपदेश प्राप्त होता है,
  • इसका रूखापन और गृहस्थ के प्रति अनादर का भाव इस साहित्य की सबसे बड़ी कमजोरी मानी जाती है,
  • मन, प्राण, शुक्र, वाक्, और कुण्डलिनी- इन पांचों के संयमन के तरीकों को राजयोग, हठयोग, वज्रयान, जपयोग या कुंडलीयोग कहा जाता है।
  • इसमे भगवान शिव की उपासना उदात्तता के साथ मिलती है।

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