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प्राचीन काव्य

प्रेमाख्यानक काव्य के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

प्रेमाख्यानक काव्य' का अर्थ है जायसी आदि निर्गुणोपासक प्रेममार्गी सूफी कवियों के द्वारा रचित प्रेम-कथा काव्य। प्रेमाख्यानक काव्य को प्रेमाख्यान काव्य, प्रेमकथानक काव्य, प्रेम काव्य, प्रेममार्गी (सूफी) काव्य आदि नामों से भी पुकारा जाता है।…

रास (जैन) साहित्य की प्रमुख रचनाएं

रास (जैन) साहित्य की प्रमुख रचनाएं और उनके रचनाकार इस प्रकार से हैं रचना का नाम- रचनाकार का नाम भरतेश्वर बाहुबली रास- शालिभद्र सूरि (1184 ई.)पांच पांडव चरित रास- शालिभद्र सूरि (14 वीं शताब्दी)बुद्धि रास - शालिभद्र सूरिचंदनबाला रास-…

रासो साहित्य के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य (Raso sahitya)

रासो साहित्य(Raso sahitya) के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य: रासो काव्य में अधिकतर वीर-गाथाएं हीं हैं।पृथ्वीराजरासो प्रसिद्ध हिन्दी रासो काव्य है।रास साहित्य जैन परम्परा से संबंधित है तो रासो का संबंध अधिकांशत: वीर काव्य से, जो डिंगल भाषा…

जैन साहित्य के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य (JAIN SAHITYA)

जैन साहित्य(JAIN SAHITYA) अब तक उपलब्ध जैन साहित्य प्राकृत एवं संस्कृत भाषा में मिलतें है।जैन साहित्य के विशेषज्ञ तथा अनुसन्धानपूर्ण लेखक अगरचन्द नाहटा थे।जैन साहित्य, जिसे ‘आगम‘ कहा जाता है, इनकी संख्या 12 बतायी जाती है।आगमों के…

सिद्ध साहित्य के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य (SIDDH SAHITYA)

सिद्ध के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य: सिद्धों का सम्बन्ध बौद्ध धर्म की वज्रयानी शाखा से है।ये भारत के पूर्वी भाग में सक्रिय थे।इनकी संख्या 84 मानी जाती है जिनमें सरहप्पा, शबरप्पा, लुइप्पा, डोम्भिप्पा, कुक्कुरिप्पा ((कणहपा))आदि मुख्य हैं। …

भक्त कवि सूरदास: एक महान व्यक्तित्व

हिन्दी काव्य के सूर्य:सूरदास वैसे तो हिंदी की काव्य उद्यान कितने ही रंग-बिरंगे और सुगंधित फूल खिले किंतु जैसा सौरभ सूरदास की रचनाओं का है , वैसा और किसी भी कवि की रचनाओं का नहीं है. इसलिए किसी सहृदय आलोचक ने ' सूर- सूर, तुलसी- शशि 'कहकर…

रीतिकालीन कवियों की प्रसिद्ध पंक्तियाँ (FAMOUS LINE OF RITIKALIN POETS)

रीतिकालीन कवियों की प्रसिद्ध पंक्तियाँ बिहारी की पंक्तियाँ इत आवति चलि, जाति उत चली छ सातक हाथ।चढ़ि हिंडोरे सी रहै लागे उसासनु हाथ।।(विरही नायिका इतनी अशक्त हो गयी है कि सांस लेने मात्र से छः सात हाथ पीछे चली जाती है और सांस…

हिंदी साहित्य का रीतिकाल(HINDI SAHITYA KA RITIKAL)

उत्तर-मध्यकाल/रीतिकाल (1650ई० - 1850ई०) उत्तर-मध्यकाल का नामकरण विवादास्पदमिश्र बंधु - 'अलंकृत काल', रामचन्द्र शुक्ल- 'रीतिकाल' ,विश्वनाथ प्रसाद मिश्र - 'श्रृंगार काल' रीतिकाल के उदय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल : 'इसका कारण जनता…