संसाधन और विकास: संसाधन की परिभाषा, वर्गीकरण एवं सरंक्षण

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संसाधन की परिभाषा

संसाधन एक ऐसा स्रोत है जिसका उपयोग मनुष्य अपने इच्छाओं की पूर्ति के लिए के लिए करता है। कोई वस्तु प्रकृति में हो सकता है हमेशा से मौज़ूद रही हो लेकिन वह संसाधन नहीं कहलाती है, जब तक की मनुष्यों का उसमें हस्तक्षेप ना हो।


संसाधन का वर्गीकरण

संसाधन को विभिन्न आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है।

उत्पत्ति के आधार पर :- जैव और अजैव
समाप्यता के आधार पर :- नवीकरण योग्य और अनवीकरण योग्य
स्वामित्व के आधार पर :- व्यक्तिगत, सामुदायिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय
विकास के स्तर के आधार पर : संभावी, विकसित भंडार और संचित कोष

संसाधनों का संरक्षण

बिना संसाधन के विकास संभव नहीं है। लेकिन संसाधन का विवेकहीन उपभोग तथा अति उपयोग कई तरह के सामाजिक, आर्थिक तथा पर्यावरणीय समस्या उत्पन्न कर देते हैं। अत: संसाधन का संरक्षण अति आवश्यक हो जाता है। संसाधन के संरक्षण के लिए विभिन्न जननायक, चिंतक, तथा वैज्ञानिक आदि का प्रयास विभिन्न स्तरों पर होता रहा है।

जैसे- महात्मा गाँधी के शब्दों में

“हमारे पास हर व्यक्ति की आवश्यकता पूर्ति के लिए बहुत कुछ है, लेकिन किसी के लालच की संतुष्टि के लिए नहीं। अर्थात हमारे पेट भरने के लिए बहुत है लेकिन पेटी भरने के लिए नहीं।

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